जेवलिन खरीदने तक के पैसे नहीं थे.. बांस से अभ्यास कर जौनपुर के रोहित ने रचा इतिहास

जौनपुर। जिले के अदारी डाभिया गांव के रहने वाले रोहित यादव ने भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में आयोजित 65वीं नेशनल इंटर स्टेट एथलेटिक्स चौंपियनशिप में 87.05 मीटर भाला फेंककर इतिहास रचा. गरीबी के बावजूद बांस के डंडे से अभ्यास कर उन्होंने विश्व में दूसरा और भारत में पहला स्थान हासिल किया.। जौनपुर के रोहित यादव ने 12 वर्ष की उम्र से ही भाला फेंकने का अभ्यास शुरू किया था. संसाधनों की कमी और गरीबी के चलते रोहित ने हार नहीं मानी. उन्होंने बांस के डंडे से अभ्यास करके शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत में पहला स्थान और दुनियां के दूसरे भाला फेंक खिलाड़ी का मुकाम हासिल किया है.। रोहित के भाई राहुल यादव ने बताया कि 13 -14 वर्ष की उम्र से वह लोग भाला फेंकने का अभ्यास शुरू किए थे. पिता जी किसान हैं परिवार की आर्थिक स्थितियां ठीक नहीं थी इसलिए जेवलिन खरीदने के पैसे तक नहीं थे. तब उन लोगों ने बांस के डंडे को जेवलिन बनाकर उससे अभ्यास करना शुरू किया. बाद में स्थितियां ठीक होती गई.। राहुल ने बताया कि रोहित भाला फेंक प्रतियोगिता में कमलवेंथ गेम के छठवां स्थान, वर्ड चौंपियनशिप में दसवां स्थान मिला था. भुनेश्वर मे भी रोहित को अन्तर्राज्यीय चौंपियनशिप में तीसरा स्थान मिला है. उन्होंने एशियन गेम्स के लिए भी क्वालीफाई किया है. 25 वर्ष की उम्र में रोहित यादव देश के नंबर एक और विश्व के नम्बर दो भाला फेंक खिलाड़ी बन गए हैं.।
साभार- अजय कुमार पांडेय


