भीटा कब्जा न रोकने पर मा0हाई कोर्ट सख्त दिया जिलाधिकारी को आदेश
जौनपुर। लाइनबाजार थानान्तर्गत चांदमारी कन्हईपुर मे आराजी नम्बर 11 भीटा भूमि पर कूट रचित कागज के सहारे राजस्व कर्मियों को अनुचित लाभ देकर भूमाफिया द्वारा खतौनी मे नाम दर्ज कराकर किये गये अवैध भवन निर्माण को ध्वस्त करने सम्बन्धी फैसले 8 माह से अधिक रोके रहने पर माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने दिनांक 28 जुलाई 2026 को जिलाधिकारी एवं सिटी मजिस्टेट को 90 दिन का समय दिया है और कहा है कि निर्धारित समय के अन्दर लम्वित वाद 343 /2024 को समाप्त करें।


ज्ञातब्य है कि उक्त भीटा भूमि पर सैकड़ो वर्ष पुराना धार्मिक स्थल डीहबाबा का पूजा स्थल है जिस पर जाने लोगों को जाने के लिए अति प्राचीन सार्वजानिक रास्ता है. भीटा भूमि एवं सार्वजानिक मार्ग पर भूमाफिया बीरबल यादव एवं उनके पुत्र गण अवैध निर्माण कर रास्ता बंद करने लगे तो स्थानीय निवासियों ने इसकी सूचना नगर मजिस्ट्रेट को दी तो मजिस्ट्रेट ने अवैध निर्माण न करने एवं सार्वजानिक रास्ता न बंद करने के लिए थाना लाइन बाजार को आदेश दिया. आदेश की अवमानना करते हुए भूमाफिया एवं उनके पुत्र गण नें अवैध निर्माण कर लिया और सार्वजनिक मार्ग को लोहे की चादर लगा कर बंद कर दिया.

पुनः जानकारी मिलने पर सिटी मजिस्ट्रेट नें बीरबल यादव के पुत्र सुनील यादव के निर्माण पर धारा 10 की कार्यवाही करते हुए निर्माण को ध्वस्त करने की नोटिस दिया और कहा कि क्यों न अवैध निर्माण ध्वस्त करा दिया जाय.अपना जवाब दाखिल करें

लेकिन इन लोगों नें न तो जवाब दिया और नहीं निर्माण रोका . पूरा मैरेज हाल बन गया और बुकिंग कर धनार्जन किया जाने लगा. स्थानीय लोगों ने जब तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट को इसकी जानकारी दी तो उन्होंने ध्वस्तीकरण सम्बन्धी वाद पर फैसला देने तो कहा लेकिन 8 महीने से फैसला रोक रखा. फैसला रोकने से भूमाफिया को पूरा समय मिला और भीटा भूमि पर अधूरे कार्य पूरा करा लिया. मैरेज हाल और शॉपिंग माल से धनार्जन करने लगा. चर्चा है कि मैरेज हाल और शॉपिंग माल से मिलने वाली आमदनी को सम्बंधित विभागों मे बंदर बाँट कर सार्वजनिक भीटा भूमि पर कब्जा जमाये हुए है.
बताते चलें कि उक्त भूमि खतौनी फसली 1351ः1356ः1357ः1359:1370 आदि मे भीटा चांदमारी दर्ज है। जिस पर कूट रचना कारित दस्तावेज लगा कर बीरबल यादव पुत्र राम प्रताप ने खतौनी मे अपना नाम दर्ज करा लिया। तत्कालीन एसडीएम सदर ने वर्ष 2006 मे चले मुक़दमे में बीरबल के पटटे को जाली घोषित करते हुए उक्त भूमि को पुनः भीटा खाते मे दर्ज करने का आदेश दिया. भूमाफिया नें दूसरी धारा मे उसी भूमि पर दूसरा मुकदमा दर्ज कराया लेकिन फिर तत्कालीन sdm सदर नें इनके पट्टे को फर्जी बताते हुए वर्ष 2010 मे उक्त भूमि सहित इसी भूमाफिया द्वारा अपने नाम करायी गई 14 अन्य सरकारी आराजीओं पर से फर्जी ढंग से दर्ज बीरबल का नाम हटा कर उक्त जमीनों को बंजर खाते मे डालने का फैसला सुनाया..क्योंकि भीटा जमीन किसी के नाम हो ही नहीं सकती. इस संबंध में माननीय सुप्रिम कोर्ट का फैसला भी है.
इस तरह से सार्वजनिक भूमि पर से कब्जा हटाने मे हिलाहवली करने तथा धारा 10 निर्माण ध्वस्त करने के फैसले को रोक रखने पर माननीय हाई कोर्ट को दखल करना पड़ा.
