देश

लाल बहादुर शास्त्री जी की ईमानदारी सादगी एक अद्भुत मिसाल, कल्पना से परे व्यक्तित्व

एक कार, सिद्धान्तों से भरा जीवन और घर मंदिर से कम नहीं

राजीव कुमार सिंह की कलम से
आज पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी के ईमानदारी पूर्वक जीवन जीने की मिसाल के बारे में लाल बहादुर शास्त्री जी के घर और जीवन में सादगी और ईमानदारी की चर्चा उन्हीं के दिल्ली आवास को जिसे अब लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल के नाम से जाना जाता है।इस मेमोरियल के अंदर जाने पर आपको बिलकुल साधारण रहन सहन मिल जायेगा।घर में मिट्टी का चूल्हा और सिल बट्टा तक देखने को मिलेगा। बिल्कुल साधारण सा कपड़ा और जूते जिसे देखकर विश्वास करना मुश्किल हो जाता है कि यह भारत के प्रधानमंत्री के कपड़े थे।

इस मेमोरियल में सबसे बड़ी चीज जो आपको देखने को मिलेगी वह शास्त्री जी की कार जिसके लिए प्रधानमंत्री ने पांच हजार रुपए का ऋण पंजाब नेशनल बैंक से लिया था। ताशकंद में जब उनकी मौत हुई तो इस कार का लोन बकाया ही था जिसे उनकी पत्नी ललिता शास्त्री ने पेंशन से भरा।
शास्त्री जी की जबान नहीं बल्कि उनका ईमानदारी पूर्वक जीया गया जीवन स्वयं में एक संदेश था। आज के समय में ईमानदारी कानून के बल पर कायम करने का सिलसिला जारी है लेकिन सार्वजनिक जीवन में बेईमानी है कि कम होने का नाम ही नहीं ले रही है।इन सबके पीछे मात्र एक लाइन का भटकाव है कि हम ईश्वर को साक्षी मान कर नहीं चल रहे हैं।हम दूसरे से ईमानदारी की अपेक्षा रख रहे हैं और खुद बेइमानी के मौके की तलाश में जी रहे हैं।जहां आध्यात्म है फिर वहां किसी कानून की जरूरत नहीं है और जहां सिर्फ कानून है वहां जीवन धन संचय की हबस में दौड़ता भागता रहेगा।

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