जौनपुर में भूमाफिया के डर से भीटा भूमि पर अवैध निर्माण की रिपोर्ट नहीं दे रहा मास्टर प्लान का जेई
माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश पर भीटा भूमि पर ध्वस्तीकरण सम्बन्धी फैसला ३महीने के अंदर प्रशासन को देना है

तत्कालीन सिटी मैजिस्ट्रेट द्वारा भीटा भूमि पर हो रहे निर्माण का निरीक्षण कर कार्य रोकने का आदेश दिया गया
जौनपुर. लाइन बाजार थाना क्षेत्र में कन्हई पुर आरजी नंबर ११ जो अंग्रेजों के शासनकाल की खतौनियों फसली १३५६ ,१३५९ एवं देश आजादी के बाद की खतौनियों फसली १३७० आदि मे भीटा दर्ज है. आजादी के पूर्व ब्रिटिश साम्राज्य एवं आजादी बाद भारत सरकार द्वारा यह भूमि पुलिस विभाग को शस्त्र प्रशिक्षण के लिये आवंटित की गयी है जो आजादी के समय की खसरा खतौनी १३५९ में भीटा और चांदमारी दर्ज है. इस भीटा भूमि पर सन १९९१ तक शस्त्र प्रशिक्षण होता रहा है,
भूमाफिया द्वारा कूट रचित दस्तावेज तैयार कर राजस्व कर्मियों की मिली भगत इस सार्वजनिक भूमि पर कब्जा करना शुरु कर दिया गया. मैरेज हाल एवं शॉपिंग मार्ट का निर्माण शुरू करा दिया गया. अवैध निर्माण करने के बारे मे स्थानीय लोगों ने प्रशासन को सूचित किया. सन २०२४ मे तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट देखने भी आये और कब्जा और अवैध निर्माण रोकने एवं कब्जा करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया. मास्टर प्लान के जेई द्वारा अवैध निर्माण के प्रथम चरण की रिपोर्ट सिटी मजिस्ट्रेट को भेजी गई. लेकिन निर्माण को ध्वस्त करने का आदेश नहीं दिया गया. दबंग भूमाफिया द्वारा सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश की अवहेलना न तो निर्माण रोका गया न निर्माण हटाया गया, अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के लिये फैसला देने के लिए तारीख पर तारीख पड़ती रही और भूमाफिया द्वारा मैरेज हाल और शॉपिंग मार्ट बना लिया गया. स्थानीय लोगों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद से उक्त ध्वस्तीकरण के संबंध सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा फैसला देने के लिये निवेदन किया गया जिस माननीय हाई कोर्ट ने ९० दिन के अंदर अवैध निर्माण के सम्बन्ध मे फैसला देने का निर्देश दिया. वर्तमान सिटी मैजिस्ट्रेट ने मास्टर प्लान के जेई से पुनः अवैध निर्माण की रिपोर्ट मांगी गईं जो अब तक जेई ने नहीं दिया, माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद अब तक लगभग दो दर्जन तारीख पड़ चुकी हैं लेकिन जेई ने रिपोर्ट जमा नहीं किया.
कार्यालय में सिटी मजिस्ट्रेट के सामने पुरानी अवैध निर्माण की रिपोर्ट पड़ी है, उसपर फैसला दे सकते हैं,
रिर्पोट न देने पर जेई को निलंबित कर सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा. ९०दिन पूरा होने मे मात्र ७ दिन और बचे हैं. चर्चा है कि अगर ९० दिन के अंदर फैसला नही आया तो अदालत की अवमानना झेलनी पड़ेगी.