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नफरत की दुनिया मे दोस्ती की मिसाल

यह बंद दुकान दीनानाथ की है जो इंडिया-पाकिस्तान बटवारे के वक़्त इस दुकान को छोड़कर इंडिया चले आए लेकिन जाते वक्त अपने साथ पूरे गांव को भी रुलाया और कहा कि
मैं वापस लौट कर आऊँगा। पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रोविंस के जिला लोरा लाई में मौजूद इस दुकान पर अभी तक वही ताला लगा है जो दुकानदार दीनानाथ जी जाते वक्त लगाकर चाबी अपने साथ ले गया थे। 79 साल से यह दुकान बंद पड़ी है। पाकिस्तानी मकान मालिक जो अब इस दुनियाँ में नही रहा उसने एक कदम आगे बढाते हुए वसीयत कर दी कि इस दुकान का ताला तोड़ना नही जब तक दुकानदार वापिस नहीं आता। इस दुकान के मालिक के मरने के बावजूद उसके बच्चों ने भी इसका ताला नहीं तोड़ा।
वसीहत में लिखा कि मैंने उस दुकानदार को जुबान दी है कि यह दुकान तुम्हारे आने तक बन्द रहेगी। मकान मालिक की औलादों ने आज तक उस ताले को हाथ तक नही लगाया।हालाँकि उन्हें मालूम है की दुकानदार यानी दीनानाथ जी इस दुनियाँ में नही रहे लेकिन वफ़ा की यादगार के तौर पर अब तक यह दुकान दो इंसानों के बीच यादगार की मिसाल बन गई है।
कमाल के बंदे थे दोनों।
इंसानों के बीच इतना प्यार! फिर नफ़रतें कहाँ से आ गई? कौन ले आया?

साभार- कुमार वैभव

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