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दो पहिया वाहन पर सफर तब सुरक्षित जब लगाएं दोनो सवारी हेल्मेट

जौनपुर. दो पहिया वाहनों पर चलने वाली दोनों सवारी हेलमेट लगाकर चलें तभी सफर सुरक्षित है लेकिन जनपद में यह फार्मूला ज़मीन पर रेयर ही दिखता है। पूरे जनवरी माह को राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के रूप में मनाया गया लेकिन सड़क चलते आपको यदा कदा ही दिखाई दे कि बाइक पर सवार दोनों लोग हेलमेट लगाकर यात्रा कर रहे हों।पीछे बैठा व्यक्ति अगर पुरुष है तो गिनें चुने बाइक पर हेलमेट लगाये दिख जायें।अगर पीछे महिला बैठी है तो और मुश्किल है कि दोनों लोग हेलमेट लगाये दिखें और अगर पीछे बैठी सवारी बच्चा है तो शायद ही हेलमेट लगाये कभी आपको दिखा हो जबकि मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार चार वर्ष से अधिक आयु के बच्चे के लिए हेलमेट लगाना अनिवार्य है।यही जमीनी हकीकत है। जबकि जनपद देश के सड़क दुघर्टना वाले टाप 100 जनपदों की सूची में शामिल है। हां! इतना जरूर है कि जब बाइक पर दोनों सवार हेलमेट लगाकर चलते दिखते हैं तो उन्हें देखकर मन में यह खुशी होती है कि गुजरने वाले व्यक्ति केवल जुर्माने के डर से नहीं बल्कि जीवन के महत्व को समझते हैं इस कारण से दोनों सवारी हेलमेट लगाये हुये हैं। जनपद में दो सड़कें अभी हाल में ही राष्ट्रीय राजमार्ग में तब्दील हुईं मछलीशहर-जंघई मार्ग और जौनपुर -रामपुर मार्ग इन सड़कों किनारे बसे गांवों के लिए बेहद जरूरी था कि सड़क यातायात जागरूकता कार्यक्रम विशेष रूप से चलाया जाता जिससे बिना हेलमेट के तेज रफ्तार से बाइक चलाने वाले युवाओं में इस बेहद गम्भीर मुद्दे के प्रति संवेदनशीलता पैदा होती क्योंकि ग्रामीण इलाकों में इस मामले में पुलिस शहर की तुलना में रोक- टोक कम करती है और सड़क सुरक्षा को हल्के में लिया जाता है। बताते चलें कि स्टाकहोम घोषणा -2020 के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार 2030 तक सड़क दुघर्टनाओं में होने वाली मृत्यु में 50 फीसदी कमी लाने के लिए प्रयास कर रही है लेकिन दुर्घटनाएं और उनसे होने वाली मौतें घटने के बजाय साल दर साल बढ़ती ही जा रही हैं।

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