चायनीज माझा से मौत कॅरोटिड आर्टिरी के कटने से हो रही है


चायनीज माझे को गर्दन लपेटने या रगड़ने से आये दिन लोग घायल हो रहे हैं. जौनपुर मे अभी दुःखद दो मौतें हो गयीं.
मेडिकली देखा जाय तो सायकिल अथवा मोटरसाइकिल से जाते समय चायनीज माझा गर्दन पर रगाड़ता है तो सबसे पहले ट्रेकिया यानी स्वास नली कटती है स्वास नली के कटने से आदमी नही मर सकता.. अस्पताल मे जाकर रिपेयर कराया जा सकता है
ट्रेकिया के बगल थोड़ा पीछे बाहर की तरफ कॅरोटिड आरटरी होती है जिससे ब्रेन को शुद्ध खून मिलता है, अगर चायनीज माझे से यह कट जाय तो थोड़ी देर मे मौत हो सकती है. ब्रेन को ब्लड सप्लाई बंद हो जाती है और पूरे शरीर का खून निकल जाता है.
यह तभी होता है चायनीज माझा सामने ट्रेकिया को काटते हुए कॅरोटिड आरटरी को काट दे या माझा गर्दन के बगल गहराई तक रगड कर कॅरोटिड काट दे.
अगर ऐसी स्थिति बन जाय तो तुरंत गाड़ी रोक दें और माझे और गर्दन के बीच आपने हाथ की अंगुली अथवा गाड़ी की चाभी डाल दे, और कॅरोटिड आरटरी को कटने से बचा लें. अंगुली तो कट सकती है लेकिन जिंदगी बच जाएगी.. बड़े सीसे वाला हेलमेट लगाए,गर्दन गमछा या मफलर, या सिर्वाइकल कॉलर लगाएं.
आजकल सोशल मिडिया पर चल रहा है कि माझे से कटने पर सिर धड़ से अलग हो गया जो एकदम गलत है. माझे से कटने पर सिर धड़ से अलग नही हो सकता क्योंकि दोनों अलग करने के लिए सिर्वाइकल वर्टीब्रा का कटना या अलग होना जरूरी है जो चायनीज माझे से होना असंभव है.
डॉ ज्ञान प्रकाश सिंह, एक्स लेक्चरर स्टेट मेडिकल एजुकेशन सर्विसेस, डिपोर्टमेंट ऑफ़ फॉरेनसिक मेडिसिन